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Madhya Pradesh Board Class 9 Hindi Kshitij Solutions Chapter 6 मेरे बचपन के दिन

By StudyEducation


क्षितिज कक्षा 9 पाठ 6 मेरे बचपन के दिन प्रश्न उत्तर हिंदी



प्रश्न-अभ्यास

प्रश्न 1: ‘मैं उत्पन्न हुई तो मेरी बड़ी खातिर हुई और मुझे वह सब नहीं सहना पड़ा जो अन्य लड़कियों को सहना पड़ता है।’ इस कथन के आलोक में आप यह पता लगाएँ कि-

(क) उस समय लड़कियों की दशा कैसी थी?
उत्तर: उस समय लड़कियों की दशा दयनीय थी। पाठ के अनुसार, लड़कियों को पैदा होते ही परमधाम (स्वर्ग) भेज दिया जाता था, अर्थात् उनकी हत्या कर दी जाती थी।

(ख) लड़कियों के जन्म के संबंध में आज कैसी परिस्थितियाँ हैं?
उत्तर: पाठ इस बारे में प्रत्यक्ष जानकारी नहीं देता, लेकिन आज की परिस्थितियों के संदर्भ में लेखिका कहती हैं कि वह समय स्वप्न जैसा लगता है, जिससे अनुमान लगता है कि आज भी लड़कियों की स्थिति पूरी तरह सुधर नहीं पाई है।

प्रश्न 2: लेखिका उर्दू-फ़ारसी क्यों नहीं सीख पाईं?
उत्तर: लेखिका उर्दू-फ़ारसी इसलिए नहीं सीख पाईं क्योंकि:

  • उनके परिवार में हिंदी का वातावरण नहीं था और बाबा फ़ारसी-उर्दू जानते थे, लेकिन लेखिका को यह उनके वश की नहीं थी।
  • एक दिन मौलवी साहब को देखकर वे डर गईं और चारपाई के नीचे छिप गईं, जिसके बाद उन्होंने उर्दू-फ़ारसी पढ़ना बंद कर दिया।

प्रश्न 3: लेखिका ने अपनी माँ के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?
उत्तर: लेखिका ने अपनी माँ के व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताओं का उल्लेख किया है:

  • धार्मिकता: माँ पूजा-पाठ बहुत करती थीं और मीरा के पद गाती थीं।
  • साहित्यिक रुचि: वे कविता लिखती थीं, प्रभाती और मीरा के पद गाती थीं।
  • शिक्षा के प्रति जागरूकता: उन्होंने लेखिका को ‘पंचतंत्र’ पढ़ाया और थोड़ी संस्कृत सिखाई।
  • संस्कृत में रुचि: उन्हें गीता में विशेष रुचि थी।

प्रश्न 4: जवारा के नवाब के साथ अपने पारिवारिक संबंधों को लेखिका ने आज के संदर्भ में स्वप्न जैसा क्यों कहा है?
उत्तर: लेखिका ने जवारा के नवाब के साथ पारिवारिक संबंधों को स्वप्न जैसा इसलिए कहा क्योंकि:

  • उस समय हिंदू-मुस्लिम परिवारों के बीच गहरी आत्मीयता थी, जैसे ताई साहिबा और लेखिका के परिवार के बीच राखी, मुहर्रम, और जन्मदिन जैसे अवसरों पर आपसी स्नेह था।
  • आज की स्थिति में सांप्रदायिकता बढ़ गई है, जो उस समय नहीं थी।
  • उस समय का वह सौहार्दपूर्ण वातावरण अब सपने जैसा लगता है, क्योंकि आज वैसी एकता और निकटता कम हो गई है।

 रचना और अभिव्यक्ति


प्रश्न 5: जेबुन्निसा महादेवी वर्मा के लिए बहुत काम करती थी। जेबुन्निसा के स्थान पर यदि आप होतीं/होते तो महादेवी से आपकी क्या अपेक्षा होती?
उत्तर: यदि मैं जेबुन्निसा की जगह होता/होती, तो महादेवी से मेरी अपेक्षाएँ होतीं:

  • मेरी मदद के बदले उनकी कविताएँ सुनना और उनसे कविता लेखन सीखना।
  • मेरे साथ अपनी मित्रता को और गहरा करना।
  • मेरी मराठी भाषा और संस्कृति को समझने में रुचि दिखाना।

प्रश्न 6: महादेवी वर्मा को काव्य प्रतियोगिता में चाँदी का कटोरा मिला था। अनुमान लगाइए कि आपको इस तरह का कोई पुरस्कार मिला हो और वह देशहित में या किसी आपदा निवारण के काम में देना पड़े तो आप कैसा अनुभव करेंगे/करेंगी?
उत्तर: यदि मुझे कोई पुरस्कार मिला और उसे देशहित या आपदा निवारण के लिए देना पड़ा, तो:

  • मुझे गर्व और प्रसन्नता होगी कि मेरा पुरस्कार देश के काम आया।
  • थोड़ा दुख भी होगा, क्योंकि वह पुरस्कार मेरी मेहनत का प्रतीक था।
  • फिर भी, देश के लिए कुछ करने की खुशी दुख से बड़ी होगी, जैसा कि महादेवी को बापू को कटोरा देने पर प्रसन्नता हुई थी।

प्रश्न 7: लेखिका ने छात्रावास के जिस बहुभाषी परिवेश की चर्चा की है उसे अपनी मातृभाषा में लिखिए।
उत्तर: (मान लें मातृभाषा हिंदी है)
छात्रावास में बहुभाषी परिवेश था। अवध की लड़कियाँ अवधी, बुंदेलखंड की लड़कियाँ बुंदेली बोलती थीं। जेबुन्निसा मराठी मिश्रित हिंदी बोलती थी। सभी एक मेस में खाते थे और एक प्रार्थना में शामिल होते थे। कोई सांप्रदायिक विवाद नहीं था। उर्दू भी पढ़ाई जाती थी, लेकिन आपस में सभी अपनी भाषा में बोलते थे। यह सौहार्दपूर्ण वातावरण था।

प्रश्न 8: महादेवी जी के इस संस्मरण को पढ़ते हुए आपके मानस पटल पर भी अपने बचपन की कोई स्मृति उभरकर आई होगी, उसे संस्मरण शैली में लिखिए।
उत्तर: मेरे बचपन के दिन भी बहुत यादगार थे। स्कूल में मेरी एक सहेली थी, जो मेरे साथ हमेशा खेलती थी। हम दोनों स्कूल के मैदान में एक पेड़ के नीचे बैठकर कहानियाँ बनाते थे। एक बार शिक्षक ने हमें कविता प्रतियोगिता में हिस्सा लेने को कहा। मैंने डरते-डरते अपनी कविता पढ़ी और तीसरा पुरस्कार जीता। वह छोटा-सा प्रमाणपत्र मेरे लिए बहुत कीमती था। उस दिन मेरी सहेली ने मुझे गले लगाकर बधाई दी थी। आज वह स्मृति मुझे बहुत प्यारी लगती है।

प्रश्न 9: महादेवी ने कवि सम्मेलनों में कविता पाठ के लिए अपना नाम बुलाए जाने से पहले होने वाली बेचैनी का जिक्र किया है। अपने विद्यालय में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते समय आपने जो बेचैनी अनुभव की होगी, उस पर डायरी का एक पृष्ठ लिखिए।
उत्तर:
दिनांक: 15 अक्टूबर 2025
आज स्कूल में सांस्कृतिक कार्यक्रम था। मैंने नृत्य प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। मंच पर जाने से पहले मेरे दिल की धड़कनें तेज हो गई थीं। मेरा नाम कब पुकारा जाएगा, यह सोचकर मैं बेचैन थी। सहेलियाँ हौसला बढ़ा रही थीं, लेकिन डर था कि कहीं गलती न हो जाए। जब मेरा नाम पुकारा गया, तो पैर काँपने लगे। फिर भी, जैसे ही नृत्य शुरू हुआ, सारी बेचैनी गायब हो गई। प्रदर्शन के बाद तालियों की गड़गड़ाहट ने मेरी बेचैनी को खुशी में बदल दिया।



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