MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 1 भारत और विश्व
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Madhya Pradesh Board Class 7 Social Science Solutions Chapter 1 भारत और विश्व
By StudyEducation
MP Board Class 7th Social Science Chapter 1 अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(1) भारत में मध्यकाल का आरम्भ …………..से माना जाता है।
(2) चोल राज्य के व्यापारिक सम्बन्ध …………. देशों से थे।
(3) कुतुबनुमा (कम्पास) का आविष्कार …………… में हुआ था।
उत्तर:
(1) आठवीं शताब्दी
(2) चीन तथा दक्षिण एशिया के अन्य
(3) चीन।
प्रश्न 2.
निम्नलिखित की सही जोड़ियाँ बनाइए
उत्तर:
(1) (d) तेरहवीं से अठारहवीं
(2) (c) राजेंद्र प्रथम
(3) (b) चीन
(4) (a) वंशानुगत दास
MP Board Class 7th Social Science Chapter 1 लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 3.
(1) भारतीय इतिहास के मध्यकाल को कितने भागों में विभाजित गया है ? उनके नाम और काल लिखिए।
उत्तर:
भारतीय इतिहास के मध्यकाल को दो भागों में विभाजित किया गया है –
- पूर्व मध्यकाल – आठवीं से बारहवीं शताब्दी तक।
- उत्तर मध्यकाल – तेरहवीं से अठारहवीं शताब्दी तक।
(2) मध्यकाल के साहित्यिक स्रोतों के नाम लिखिए।
उत्तर:
मध्यकाल के साहित्यिक स्रोत ताड़पत्रों और भोज पत्रों पर लिखा विवरण था।
(3) यूरोप के मध्यकाल में सामन्तों की जीवन शैली कैसी थी?
उत्तर:
यूरोप के मध्यकाल में सामन्त विलासितापूर्ण जीवन व्यतीत करते थे और किसानों पर अत्याचार करते थे। गरीब किसान वंशानुगत दास (सर्फ) बने रहते थे।
(4) संगठित होकर अरबों ने अपने राज्य का विस्तार कहाँ तक किया ?
उत्तर:
संगठित होकर अरबों ने अपने राज्य का विस्तार भारत की उत्तर – पश्चिमी सीमा तक किया।
MP Board Class 7th Social Science Chapter 1 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 4.
(1) मध्यकालीन सभ्यता के विकास में अरब व्यापारियों के योगदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अरब लोग कुशल व्यापारी थे। राजनैतिक सत्ता स्थापित करने के साथ – साथ उन्होंने भारत, चीन, यूरोप तथा पूर्व से पश्चिम अफ्रीका तक व्यापार किया। उन्होंने व्यापार से धन कमा कर उसका उपयोग कला, साहित्य और विज्ञान को प्रोत्साहन देने में किया। अरबों ने विभिन्न देशों के साथ अपने व्यापारिक संपर्क बढ़ाकर वहाँ के ज्ञान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाया।
उन्होंने प्राचीन ग्रीक तथा भारतीय वैज्ञानिक ग्रन्थों का अरबी में अनुवाद कराया। खगोलशास्त्र तथा गणित का उच्चकोटि का ज्ञान पश्चिमी देशों तक पहुँचाया। अरबों ने ही चीन के बारूद, कागज, कुतुबनुमा आदि आविष्कारों का ज्ञान यूरोप के देशों में पहँचाया। यहाँ की सम्पन्नता और उच्च संस्कृति उत्तर – पश्चिम के शासकों के लिए आकर्षण का केन्द्र थी।