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NCERT Class 8 Social Science Chapter 2 भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण Solutions


भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण

1. दिल्ली सल्तनत और मुगल साम्राज्य की राजनीतिक रणनीतियों की तुलना कीजिए। इनमें क्या समानताएँ और भिन्नताएँ थीं?

उत्तर:
दिल्ली सल्तनत और मुगल साम्राज्य दोनों ही मध्यकालीन भारत की महत्वपूर्ण राजनीतिक शक्तियाँ थीं।

समानताएँ :

  1. दोनों का शासन केंद्रीकृत था और सारा अधिकार सुल्तान या सम्राट के हाथ में होता था।
  2. दोनों ने अपने राज्य का विस्तार मुख्यतः युद्धों और विजयों के माध्यम से किया।
  3. दोनों की आय का मुख्य स्रोत भूमि कर था।
  4. दोनों ने बड़ी और संगठित सेना रखी।

भिन्नताएँ :

  1. दिल्ली सल्तनत के शासक अधिकतर कठोर और सैन्य शक्ति पर निर्भर थे, जबकि मुगल शासकों विशेषकर अकबर ने कूटनीति और समझौते की नीति अपनाई।
  2. सल्तनत में ‘इक्ता प्रणाली’ थी, जबकि मुगलों ने ‘मनसबदारी प्रणाली’ शुरू की।
  3. अकबर ने जजिया कर हटा दिया और धार्मिक सहिष्णुता अपनाई, जबकि कई सल्तनत शासकों ने जजिया कर लगाया।
  4. मुगल प्रशासन अधिक संगठित और स्थिर था।

2. विजयनगर साम्राज्य और अहोम साम्राज्य जैसे अन्य राज्यों की अपेक्षा अधिक समय तक पराजित होने से कैसे बच सके? उनकी सफलता में किन भौगोलिक, सैन्य और सामाजिक कारकों का योगदान था?
उत्तर:

(क) विजयनगर साम्राज्य

विजयनगर साम्राज्य

भौगोलिक कारण: राजधानी हंपी पहाड़ियों और तुंगभद्रा नदी से घिरी थी, जिससे सुरक्षा मिलती थी।

सैन्य कारण:

  • शक्तिशाली सेना और घुड़सवार दल।
  • नायकों की व्यवस्था से स्थानीय सैनिक सहायता मिलती थी।

सामाजिक और आर्थिक कारण:

  • समृद्ध व्यापार और विदेशी व्यापारियों से संपर्क।
  • जनता का समर्थन और धार्मिक सहिष्णुता।

(ख) अहोम साम्राज्य

अहोम साम्राज्य

भौगोलिक कारण: ब्रह्मपुत्र घाटी, घने जंगल और पहाड़ों ने बाहरी आक्रमणों से रक्षा की।

सैन्य कारण:

  • ‘पाइक प्रणाली’ के कारण हर व्यक्ति सेना में सेवा देता था।
  • गुरिल्ला युद्ध की रणनीति अपनाई गई।

सामाजिक कारण:

  • स्थानीय लोगों की एकता और सहयोग।
  • इन कारणों से ये राज्य लंबे समय तक स्वतंत्र रहे।

3. कल्पना कीजिए कि आप अकबर या कृष्णदेवराय के दरबार में एक विद्वान हैं। अपने किसी मित्र को पत्र लिखकर वहाँ की राजनीति, व्यापार, संस्कृति और समाज का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
प्रिय मित्र,
सादर नमस्कार।

मैं इस समय महान सम्राट अकबर के दरबार में विद्वान के रूप में कार्य कर रहा हूँ। यहाँ की राजनीति बहुत संगठित है। सम्राट ने मनसबदारी व्यवस्था लागू की है और विभिन्न प्रांतों में योग्य अधिकारियों की नियुक्ति की है।

व्यापार बहुत बढ़ गया है। देश-विदेश से व्यापारी आते हैं। चाँदी का रुपया और ताँबे का दाम प्रचलित है।

संस्कृति के क्षेत्र में कला, संगीत और चित्रकला को प्रोत्साहन मिल रहा है। संस्कृत ग्रंथों का फारसी में अनुवाद किया जा रहा है।

समाज में विभिन्न धर्मों के लोग शांति से रहते हैं। सम्राट ने जजिया कर समाप्त कर दिया है और सभी धर्मों का सम्मान किया है।

आपका मित्र


4. अकबर, जो अपनी युवावस्था में एक क्रूर विजेता था, कुछ वर्षों बाद कैसे सहिष्णु और दयालु हो गया? ऐसे परिवर्तन का क्या कारण हो सकता है?

उत्तर:
अकबर ने अपने आरंभिक काल में कई युद्धों में कठोरता दिखाई, जैसे चित्तौड़ विजय में। परंतु समय के साथ उसे समझ आया कि केवल युद्ध और कठोरता से राज्य स्थिर नहीं रह सकता।

उसके परिवर्तन के कारण —

  1. विभिन्न धर्मों के विद्वानों से चर्चा।
  2. विशाल साम्राज्य को एकजुट रखने की आवश्यकता।
  3. अनुभव और परिपक्वता।

इसी कारण उसने “सुलह-ए-कुल” की नीति अपनाई और धार्मिक सहिष्णुता दिखाई।


5. यदि विजयनगर साम्राज्य तालीकोटा का युद्ध जीत जाता तो क्या होता? कल्पना कीजिए और दक्षिण भारत के राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास पर उसके वर्णन कीजिए।

उत्तर:
तालीकोटा का युद्ध में यदि विजयनगर जीत जाता तो —

  1. दक्षिण भारत में विजयनगर का प्रभुत्व और मजबूत हो जाता।
  2. दक्कन सल्तनतें कमजोर हो जातीं।
  3. व्यापार और कला का और विकास होता।
  4. मंदिरों और वास्तुकला का विस्तार होता।
  5. दक्षिण भारत राजनीतिक रूप से अधिक संगठित रहता।

6. प्रारंभिक सिख पंथ द्वारा प्रचारित अनेक मूल्य जैसे समानता, सेवा और न्याय आज भी प्रासंगिक हैं। इनमें से किसी एक मूल्य का चयन कीजिए और चर्चा कीजिए कि यह समकालीन समाज में कैसे प्रासंगिक है।

उत्तर:
सिख धर्म के गुरुओं ने समानता का संदेश दिया।
समानता का अर्थ है कि सभी मनुष्य बराबर हैं, चाहे उनका धर्म, जाति या लिंग कुछ भी हो।

आज के समाज में यह मूल्य इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि —

  • समाज में भेदभाव समाप्त करने के लिए।
  • महिला और पुरुष को समान अधिकार देने के लिए।
  • सामाजिक न्याय और भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए।

7. कल्पना कीजिए कि आप किसी बंदरगाह नगर (सूरत, कालीकट या हुगली) में एक व्यापारी हैं। वहाँ वस्तुओं, व्यापार करने वाले लोगों, जहाजों की आवाजाही आदि के संबंध में आप जो दृश्य देखते हैं, उनका वर्णन कीजिए।

उत्तर:
मैं सूरत के बंदरगाह पर एक व्यापारी हूँ। यहाँ दूर-दूर के देशों से जहाज आते हैं।
बाजारों में मसाले, कपास, रेशम और कीमती वस्तुओं का व्यापार होता है। अरब, फारसी और यूरोपीय व्यापारी यहाँ आते हैं।
समुद्र में बड़े जहाज लंगर डालते हैं। मजदूर माल चढ़ाते और उतारते हैं। बंदरगाह पर दिन-रात चहल-पहल रहती है।
सूरत वास्तव में उस समय का एक समृद्ध व्यापारिक केंद्र है।

महत्वपूर्ण प्रश्न (Page 21)

1. इस कालखंड में विदेशी आक्रमणों एवं नए राजवंशों के उदय ने भारत की राजनैतिक सीमाओं को किस प्रकार नया आकार दिया?

उत्तर:
इस काल में तुर्क, अफगान और मुगल शासकों के आक्रमणों से भारत की राजनैतिक स्थिति में बड़े परिवर्तन हुए। 1206 में दिल्ली सल्तनत की स्थापना हुई, जिससे उत्तर भारत में एक नई सत्ता का उदय हुआ। इसके बाद विभिन्न वंशों — गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैयद और लोदी — ने शासन किया।

1526 में बाबर ने मुगल साम्राज्य की स्थापना की, जिससे एक विशाल केंद्रीकृत साम्राज्य बना। दक्षिण भारत में विजयनगर साम्राज्य और दक्कन में बहमनी सल्तनत का उदय हुआ।

लगातार युद्धों, विजयों और नए राज्यों के बनने-बिगड़ने से भारत का राजनैतिक मानचित्र बार-बार बदलता रहा। कुछ क्षेत्र सल्तनत और मुगलों के अधीन आए, जबकि कई स्थानों पर राजपूत, मराठा, सिख और अहोम शासकों ने स्वतंत्रता बनाए रखी। इस प्रकार भारत की सीमाओं और सत्ता-केंद्रों को नया रूप मिला।


2. भारतीय समाज ने विदेशी आक्रमणों का सामना किस प्रकार किया? राजनैतिक अस्थिरता के वातावरण में भारतीय अर्थव्यवस्था ने किस प्रकार सामंजस्य स्थापित किया?

उत्तर:
भारतीय समाज ने विदेशी आक्रमणों का सामना साहस और एकता से किया। राजपूतों, अहोमों, सिखों और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों ने समय-समय पर प्रतिरोध किया। उदाहरण के लिए, मेवाड़ के महाराणा प्रताप ने मुगलों का विरोध किया और सिख गुरुओं ने अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया।

राजनैतिक अस्थिरता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रही। कृषि, कुटीर उद्योग और व्यापार चलते रहे। मंदिर, नगर और व्यापारी समुदाय आर्थिक गतिविधियों के केंद्र बने रहे। हुंडी प्रणाली से व्यापारियों को बिना धन साथ लिए व्यापार करने में सुविधा हुई।

इस प्रकार भारतीय समाज ने अपनी परंपराओं को बनाए रखते हुए परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढाला और आर्थिक गतिविधियों को जारी रखा।


3. इस कालखंड ने लोगों के जीवन पर क्या प्रभाव डाला?

उत्तर:
इस कालखंड का लोगों के जीवन पर मिश्रित प्रभाव पड़ा।

  • निरंतर युद्धों और करों के कारण किसानों और आम जनता को कष्ट झेलने पड़े।
  • कई स्थानों पर मंदिरों और नगरों को क्षति पहुँची।
  • कुछ शासकों ने धार्मिक कर (जजिया) लगाया, जिससे सामाजिक तनाव उत्पन्न हुआ।

लेकिन दूसरी ओर —

  • कृषि और सिंचाई में सुधार हुआ।
  • नए शहरों, सड़कों और भवनों का निर्माण हुआ।
  • कला, वास्तुकला, संगीत और चित्रकला का विकास हुआ (जैसे मुगल स्थापत्य और दक्षिण भारत के भव्य मंदिर)।
  • विभिन्न संस्कृतियों के मेल से एक साझा सांस्कृतिक विरासत बनी।

अतः यह काल संघर्ष और चुनौतियों के साथ-साथ सांस्कृतिक विकास और सामाजिक अनुकूलन का भी समय था।

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