MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 12 कर्तव्यपालनम्
Madhya Pradesh Board Class 9 Sanskrit Solutions Chapter 12 कर्तव्यपालनम्
By StudyEducation
MP Board Class 9th Sanskrit Chapter 12 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर लिखो)
(क) जनाः वञ्चनया किं कर्तुं कामयन्ते? (लोग छल से क्या करना चाहते हैं?)
उत्तर:
स्वार्थ साधनं। (अपना स्वार्थ साधना चाहते हैं।)
(ख) आत्मनः देशस्य वा समुन्नतेः मूलमन्त्र: कः? (अपने देश की उन्नति का मूल मंत्र क्या है?)
उत्तर:
कर्त्तव्यपालनमेव। (कर्त्तव्य का पालन करना है)
(ग) जीवन किम् आवश्यकम्? (जीवन में क्या आवश्यक है?)
उत्तर:
सत्कार्यम्। (अच्छे कार्य करना।)
(घ) कर्त्तव्यपरायणानां गणना कुत्र भवति? (कर्त्तव्यपालन की गणना कहाँ होती है?)
उत्तर:
श्रेष्ठ पुरुषेषु। (श्रेष्ठ पुरुषों में)
(ङ) यस्य बुद्धिः व्यापन्ना अस्ति सः कर्त्तव्यपालनं करोति न वा? (जिसकी बुद्धि भ्रष्ट हो गई है वह कर्त्तव्य-पालन करता है या नहीं?)
उत्तर:
न करोति। (नहीं करता है।)
प्रश्न 2.
एक वाक्येन उत्तरं लिखत (एक वाक्य में उत्तर लिखो)
(क) कृषकाः देशस्य उन्नति कथं कुर्वन्ति?(कृषक देश की उन्नति कैसे करता हैं?)
उत्तर:
कृषकाः देशस्य उन्नतिं कृषिकार्येण कुर्वन्ति। (कृषक देश की उन्नति कृषि कार्यों के द्वारा करता है।)
(ख) कर्त्तव्यपालनं किमर्थम् आवश्यकं वर्तते? (कर्त्तव्यपालन क्यों आवश्यक है?)
उत्तर:
कर्त्तव्यपालनं देशस्य समुचित रूपेण उन्नतिम् वर्तते। (कर्तव्यपालन से देश का समुचित रूप से उन्नति होती है।
(ग) यदि जनाः स्वकर्त्तव्यपालनं न कुर्वन्ति तर्हि किं भविष्यति? (यदि लोग अपने कर्त्तव्य का पालन नहीं करेंगे तो क्या होगा?)
उत्तर:
यदि जनाः स्वकर्तव्य पालनं न कुर्वन्ति तर्हि देशस्य समुचित उन्नतिम् न भविष्यति। (यदि लोग अपने कर्तव्य का पालन नहीं करेंगे तो देश की समुचित उन्नति नहीं होगी।)
(घ) जनाः देशस्य हितसाधनं कथं कुर्वन्ति? (लोग देश का हित किस तरह से करते हैं?)
उत्तर:
जनाः देशस्य हितसाधनं स्वकर्त्तव्यपालन माध्यमेन् कुर्वन्ति। (लोग देश का हित अपने कर्त्तव्य-पालन के माध्यम से करते हैं।)
प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत
(क) कर्त्तव्यपालनं किमर्थन् आवश्यकम्? (कर्तव्यपालन क्यों आवश्यक है?)
उत्तर:
कर्त्तव्यपालनं सर्वहिताय आवश्यकम्। (कर्त्तव्यपालन सबके हित के लिए आवश्यक है।)
(ख) ये कर्त्तव्यपालन कुर्वन्ति ते केषां हितसाधनं कुर्वन्ति?(जो कर्त्तव्यपालन करते हैं वे किस तरह हित साधन करते हैं?)
उत्तर:
ये कर्त्तव्यपालनं कुर्वन्ति ते न केवलम् आत्मनः एव प्रत्युत् सम्पूर्णस्यापि देशस्य हितसाधनं कुर्वन्ति। (जो कर्त्तव्यपालन करते हैं वे न केवल अपना अपितु समस्त देश का हित करते हैं।)
(ग) देशस्य उन्नतियोजना केन कथम् अधिकफलवती भवेत्? (देश की योजना की उन्नति कैसे और किसके द्वारा अधिक फलीभूत होती है?)
उत्तर:
देशस्य उन्नतियोजना जनाः कर्त्तव्यपालनं प्रति ध्यानं ददाति तर्हि अधिकफलवती भवेत्। (देश की उन्नति लोगों के द्वारा कर्तव्यपालन के माध्यम से अधिक फलवती होती है।)
प्रश्न 4.
यथायोग्यं योजयत-
प्रश्न 5.
रिक्तस्थानानि पूरयत
(क) देशे सर्वे जनाः कर्त्तव्यपालनं कुर्वन्ति।
(ख) जनेषु कर्त्तव्यपालनम् प्रति महती शिथिलता समागता वर्तते।
(ग) जनाः वञ्चनया एव स्वार्थ साधनं कर्तुं कामयन्ते।
(घ) इयम् भूमिः कर्मभूमिः अस्ति।
(ङ) कर्तव्य पालनमेव आत्मनः देशस्य वा समुन्नतेः मूलमन्त्र।
प्रश्न 6.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘आम्’ अशुद्धवाक्यानां समक्षं ‘न’ इति लिखत
उदाहरणं यथ –
जीवने कार्यत् आवश्यकम् अस्ति। – (आम्)
कर्तव्यपालनम् आवश्यकं नास्ति। – (न)
(क) नैकाः जनाः वञ्चनया एव स्वार्थ साधनं कर्तुं कामयन्ते।
(ख) स्वकर्तव्यपालन न करणीयम्।
(ग) कर्त्तव्यपालनमेव देशस्य समुन्नतेः मूलमन्त्रः।
(घ) मनुष्योपरि अनेकविधानां कर्त्तव्यानां पालनस्य महान् भारो वर्त्तते।
(ङ) इयम् भूमिः कर्मभूमिः नास्ति।
उत्तर:
(क) (न)
(ख) (न)
(ग) (आम्)
(घ) (आम्)
(ङ) (न)
प्रश्न 7.
क्रियापदानां धातुं वचनं पुरुषं च लिखत
प्रश्न 8.
सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धेः नाम लिखत
(क) एकोऽपि
उत्तर:
एकः+अपि = पूर्व रूप स्वर सन्धि
(ख) प्रत्येकम्
उत्तर:
प्रति+एक = स्वर सन्धि
(ग) सम्पूर्णस्यापि
उत्तर:
सम्पूर्णस्य+अपि = स्वर सन्धि
(घ) कानिचित्
उत्तर:
कानि+चित् = स्वर सन्धि
प्रश्न 9.
उदाहरणानुसारं शब्दानां विभक्तिं वचनं च लिखत
प्रश्न 10.
निम्नाङ्कितैः अव्ययैः वाक्यनिर्माणं कुरुत
यथा-सः अपि पठति।
(क) यदि-तर्हि
(ख) यत-तत
(ग) यावत्
(घ) एव
(ङ) कृते
उत्तर:
(क) यदि सः आगच्छति तर्हि अहं अपि गमिष्यामि।
(ख) यतः शान्तिः भवति ततः सुखम् भवति।
(ग) तावत्-यावत् वृष्टिः न भवति तावत् कृषि कार्यं न भवति।
(घ) सः एव गच्छति।
(ङ) मम कृते पुस्तकं ददातु।
📚 All Chapters:
Durva Sanskrit Book Class 9 Solutions
- Chapter 1 जयतु मे माता (गीतम्)
- Chapter 2 अलसस्य स्वप्नः (कथा)
- Chapter 3 सुभाषितानि (पद्यम्)
- Chapter 4 पितृसेवा परं ज्ञानम् (कथा)
- Chapter 5 सर्वदमनः भरतः (नाट्यांशः)
- Chapter 6 शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम् (पद्यम्)
- Chapter 7 सुविज्ञातमेव विश्वसेत् (कथा)
- Chapter 8 दशपुरीया अष्टमूर्तिः (वर्णनात्मकः)
- Chapter 9 पितृभक्तः श्रवणकुमारः (संवादः)
- Chapter 10 नीतिश्लोकाः (पद्यम्)
- Chapter 11 संसर्गजाः दोषगुणाः (कथा)
- Chapter 12 कर्तव्यपालनम् (संवादः)
- Chapter 13 गीतादर्शनम् (पद्यम्)
- Chapter 14 वीरबाला (संवादः)
- Chapter 15 श्रेष्ठतमं कार्यम् (कथा)
- Chapter 16 अध्ययने प्रत्यूहः (नाट्यांशः)
- Chapter 17 गुरुभक्तः आरुणिः (संवादः)
- Chapter 18 पुरुषोत्तमः (पद्यम्)
- Chapter 19 उपायैः सर्वं शक्यम् (कथा)
- Chapter 20 वेधशाला (पत्रम्)
- Chapter 21 सूक्तयः (स्फुट)