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NCERT MP Board Class 9 Social Science History Chapter 5 आधुनिक दुनिया में चरवाहे Solutions

NCERT MP Board Class 9 Social Science History Chapter 5 आधुनिक दुनिया में चरवाहे Solutions भारत और समकालीन विश्व-१ खण्ड II: जीविका, अर्थव्यवस्था एवं समाज प्रश्न: 1. स्पष्ट कीजिए कि घुमंतू समुदायों को बार-बार एक जगह से दूसरी जगह क्यों जाना पड़ता है? इस निरंतर आवागमन से पर्यावरण को क्या लाभ हैं? उत्तर: घुमंतू ऐसे लोग होते हैं जो किसी एक जगह टिक कर नहीं रहते बल्कि रोजी-रोटी के जुगाड़ में यहाँ से वहाँ घूमते रहते हैं। देश के कई हिस्सों में हम घुमंतू चरवाहों को अपने जानवरों के साथ आते-जाते देख सकते हैं। चरवाहों की किसी टोली के पास भेड़-बकरियों का रेवड़ या झुंड होता है तो किसी के पास ऊँट या अन्य मवेशी रहते हैं। जम्मू और कश्मीर के गुज्जर बकरवाल समुदाय के लोग भेड़-बकरियों के बड़े-बड़े रेवड़ रखते हैं। इस समुदाय के अधिकतर लोग अपने मवेशियों के लिए चरागाहों की तलाश में भटकते-भटकते उन्नीसवीं सदी में यहाँ आए थे। जैसे-जैसे समय बीतता गया वे यहीं के होकर रह गए; यहीं बस गए। इसके बाद वे सर्दी-गर्मी के हिसाब से अलग-अलग चरागाहों में जाने लगे। जाड़ों में जब ऊँची पहाडियाँ बर्फ से ढक जातीं तो वे शिवालिक की निच...

NCERT MP Board Class 9 Social Science History Chapter 4 वन समाज और उपनिवेशवाद Solutions

NCERT MP Board Class 9 Social Science History Chapter 4 वन समाज और उपनिवेशवाद Solutions भारत और समकालीन विश्व-१ खण्ड II: जीविका, अर्थव्यवस्था एवं समाज प्रश्न: 1. औपनिवेशिक काल के वन प्रबंधन में आए परिवर्तनों ने इन समूहों को कैसे प्रभावित किया: (i) झूम खेती करने वालों को। उत्तर: औपनिवेशिक काल के वन प्रबंधन में आए परिवर्तनों ने झूम खेती करने वालों, घुमंतू और चरवाहा समुदायों, लकड़ी और वन-उत्पादों का व्यापार करने वाली कंपनियों, बागान मालिकों, और शिकार खेलने वाले राजाओं और अंग्रेज़ अफ़सरों को विभिन्न तरीकों से प्रभावित किया। झूम खेती करने वालों को झुमिया, घुमंतु किसान, या आदिवासी कृषक कहा जाता है। घुमंतू कृषि के लिए जंगल के कुछ भागों को बारी-बारी से काटा और जलाया जाता है। मॉनसून की पहली बारिश के बाद इस राख में बीज बो दिए जाते हैं और अक्तूबर-नवंबर में फ़सल काटी जाती है। इन खेतों पर दो-एक साल खेती करने के बाद इन्हें 12 से 18 साल तक के लिए परती छोड़ दिया जाता है जिससे वहाँ फिर से जंगल पनप जाए। (ii) घुमंतू और चरवाहा समुदायों को। उत्तर: घुमंतू और चरवाहा समुदायों को उनके दैनिक जीवन पर नए वन कानून...

NCERT MP Board Class 9 Social Science History Chapter 3 नाज़ीवाद और हिटलर का उदय Solutions

NCERT MP Board Class 9 Social Science History Chapter 3 नाज़ीवाद और हिटलर का उदय Solutions भारत और समकालीन विश्व-१ खण्ड I: घटनाएँ और प्रक्रियाएँ प्रश्न: 1. वाइमर गणराज्य के सामने क्या समस्याएँ थीं? उत्तर: वाइमर गणराज्य के सामने निम्नलिखित समस्याएँ थीं:  (i) संविधान में कुछ खामियाँ थीं, जिसके कारण हमेशा तानाशाह का खतरा बना रहता था। (ii) पुराने साम्राज्य द्वारा किए गए अपराधों का हर्जाना नवजात वाइमर गणराज्य से वसूल किया जा रहा था। (iii) रूढ़िवादी/पुरातनपंथी राष्ट्रवादी मिथकों की आड़ में उन्हें तरह तरह के हमलों का निशाना बनाया जाने लगा। (iv) आनुपातिक प्रतिनिधित्व के अनुच्छेद के कारण किसी भी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिल पाता था और गठबंधन सरकारें बनती थीं। (v) युद्ध से संबंधित हर्जाने को अदा करने के चक्कर में अर्थव्यवस्था की हालत खराब थी। 2. इस बारे में चर्चा कीजिए कि 1930 तक आते-आते जर्मनी में नात्सीवाद को लोकप्रियता क्यों मिलने लगी? उत्तर: राजनीतिक रैडिकलवादी विचारों को 1923 के आर्थिक संकट से और बल मिला। जर्मनी ने पहला विश्वयुद्ध मोटे तौर पर कर्ज लेकर लड़ा था। और युद्ध के बाद तो उसे स्व...

NCERT MP Board Class 9 Social Science History Chapter 2 यूरोप में समाजवाद और रूसी क्रांति Solutions

NCERT MP Board Class 9 Social Science History Chapter 2 यूरोप में समाजवाद और रूसी क्रांति Solutions भारत और समकालीन विश्व-१ खण्ड I: घटनाएँ और प्रक्रियाएँ प्रश्न: 1. रूस के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हालात 1905 से पहले कैसे थे? उत्तर: रूसी किसान यूरोप के बाकी किसानों के मुकाबले एक और लिहाज़ से भिन्न थे। यहाँ के किसान समय-समय पर सारी जमीन को अपने कम्यून (मीर) को सौंप देते थे और फिर कम्यून ही प्रत्येक परिवार की ज़रूरत के हिसाब से किसानों को जमीन बाँटता था। ग्रामीण क्षेत्रों में समाज मजदूरों, अभिजात वर्ग और चर्च के बीच बँटा हुआ था। अभिजात वर्ग व चर्च के सदस्यों के पास विशाल भूमिखंड थे। शहरों में समाज मालिकों और नौकरों में विभाजित था। श्रमिक अपने-अपने कौशलों के अनुसार समूहों में बँटे हुए थे। जब रूसी रेल नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा था तो सन् 1890 के दशक में कई कारखाने स्थापित किए गए और कारखानों में विदेशी निवेश बढ़ गया। बीसवीं सदी के प्रारंभ में 85 प्रतिशत रूसी कृषक थे। महिला श्रमिक कुल श्रमिक संख्या का 31 प्रतिशत थे। शहरों में कारखानों के मजदूरों को बहुत कम तनख्वाहें दी जाती थीं। उनकी आ...