NCERT Class 8 Sanskrit Chapter 11 Question Answer Solutions सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः)
NCERT Class 8 Sanskrit Chapter 11 Question Answer Solutions सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः) सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः) हिंदी अनुवाद वीरवर नामक एक राजपुरुष राजा शूद्रक की सेवा में नियुक्त था। उसे वेतन के रूप में प्रतिदिन सौ स्वर्ण मुद्राएं (सुवर्ण शतचतुष्टयम्) प्राप्त होती थीं। वह अपने वेतन का आधा भाग देवकार्य (धार्मिक कार्यों) में लगाता था, एक चौथाई भाग निर्धनों में बाँटता था, और शेष एक चौथाई भाग अपनी पत्नी के हाथ में सौंप देता था। अपनी तलवार लेकर वह दिन-रात राजप्रवेशद्वार पर एक रक्षक के रूप में खड़ा रहकर सेवा करता था। एक बार रात में राजा के आदेश पर वह किसी करुण क्रंदन (दुख भरे रोने) की आवाज का अनुसरण करते हुए नगर से बाहर गया, वहाँ उसने एक रोती हुई, दिव्य आभूषणों से सुशोभित सुंदर स्त्री को देखा। जब उसने उस रोदन का कारण पूछा तो उसे ज्ञात हुआ कि वह स्त्री स्वयं राजा शूद्रक की राजलक्ष्मी (राजमहिषी/रानी) है। उसके वचन से वीरवर को यह पता चलता है कि राजा की आयु केवल तीन दिन ही शेष है। यह सुनकर वह राजा की दीर्घायु के लिए उपाय पूछता है। तब राजलक्ष्मी एक अत्यंत कठिन उपाय बताती है — यदि वीरव...